IPL 2021: RR Vs PBKS - मयंक-राहुल पर भारी पड़ा Tyagi का अंतिम ओवर।
सब कुछ बेचकर बना न्यूजीलैंड का पसंदीदा क्रिकेटर।
वर्ष 2017,
एक बल्लेबाज अपना सारा सामान लेकर हताश और निराश खड़ा है और वह अपना देश छोड़ना चाहता
है। वो भी कौन सा देश? दक्षिण अफ्रीका। जहाँ पर वो पला-बढ़ा और क्रिकेट की बारीकियां
सीखीं, डोमेस्टिक लेवल पर भी खेला। हर खिलाडी की तरह वह भी अपने देश के लिए खेलना चाहता
था, जीतना चाहता था। उसे अपने ऊपर भरोसा था पर देश को उसके ऊपर भरोसा नहीं था।
अपना घर-बार,
गाड़ी-मोटर, जमीन-जायदाद सब बेच कर देश से जाना चाहता था। इन सब की सिर्फ एक वजह अपने
देश दक्षिण अफ्रीका के लिए नहीं खेल पाना। उसके पास दो विकल्प थे इंग्लैंड और न्यूजीलैंड।
और वो चुनता है न्यूजीलैंड।
कट टू - 2 जून 2021
पहले विश्व
टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल को खेलने के लिए न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड पहुंची है।
पर उसके पहले इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच 2 टेस्ट की सीरीज होती है।
Day-1, टीम स्कोर 173/3, बल्लेबाज 98 पर।
ओली रॉबिनसन के 15 ओवर की दूसरी गेंद पर बल्लेबाज ने लेग साइड में फ्लिक किया और गेंद सीमा रेखा के बाहर और 4 रन। बल्लेबाज का शतक।
अपने पहले ही टेस्ट मैच में, वह भी लॉर्डस में।
क्रिकेट का मक्का कहा जाने वाला लॉर्डस। जहाँ शतक बनाना हर बल्लेबाज का सपना रहता है।
हर किसी का नाम लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर अंकित भी नहीं होता। 'क्रिकेट के भगवान' कहे
जाने वाले सचिन भी यहाँ शतक के लिए तरस गए, चतुर कप्तान और महान बल्लेबाज रिकी पोंटिंग
को भी इस मैदान ने मायूस ही भेज दिया, उस मैदान पर बल्लेबाज का पहला शतक।
Day-2, टीम स्कोर 371/9, बल्लेबाज 194 पर।
मार्क वुड(Mark Wood) के 26वें ओवर की अंतिम गेंद, थोड़ी सी उछलते हुए, बल्लेबाज पुल खेलने के लिए गया टॉप एज और गेंद 6 रन के लिए। दोहरा शतक। वही बल्लेबाज, जिसने चौका मार कर शतक बनाया उसी ने छक्का मारकर दोहरा शतक बनाया।
पूरी न्यूजीलैंड की टीम लॉर्डस की बालकनी में खड़े होकर अभिवादन कर रही थी। न्यूजीलैंड बोर्ड अपने चयन पर खुश होगा और दक्षिण अफ्रीका पछता रहा होगा। सारा जहाँ जैसे इस व्यक्ति के जुझारू रवैये के आगे नतमस्तक हुआ जा रहा था। ICC के ट्विटर हैंडल से भी डेवन को सलामी दी गई।
An out-of-this-world performance from Devon Conway on debut 🤩#ENGvNZ pic.twitter.com/XSSXKHrlKJ
— ICC (@ICC) June 3, 2021
लॉर्डस के ऑनर
बोर्ड पर नाम तो 2 जून को ही लिखा दिया था 3 जून को तो उसने इतिहास में अपना नाम लिखवा
लिया और नाम भी क्या -
कौन है कॉनवे?
डेवन कॉनवे
का जन्म जोहान्सबर्ग के ट्रांसवाल में हुआ। क्रिकेट का शौक था और 18 साल में ही अपना
लिस्ट-A और फर्स्ट क्लास डेब्यू भी कर लिया। डेब्यू तो हुआ पर प्रदर्शन नहीं हुआ। 9
साल के बाद प्रोवेंसीअल स्तर पर डोमेस्टिक में अपना पहला दोहरा शतक बनाया। मतलब भारत
के डोमेस्टिक लेवल से नीचे वाले स्तर के क्रिकेट। वे लायंस के लिए खेले पर प्रदर्शन
मायूसी भरा ही रहा। 12 मैचों में एक अर्धशतक। उनका हाल अपने रोबिन उथ्थपा जैसा ही रहा।
उथ्थपा को कभी भी किसी फिक्स बैटिंग पोजीशन
पर नहीं खिलाया गया वैसे ही डेवन कॉनवे के साथ हुआ। कोई खिलाड़ी नहीं खेल रहा होता तो
कॉनवे को बुला लेते थे।
चल मुसाफिर
जीवन चलने का
नाम है, रुकने से तो बढ़ेगा नहीं। कोशिश करनी थी पर कहाँ? उम्र भी अब 27 की हो गई थी।
अब तक तो कितने खिलाड़ी हज़ारों रन बना लेते हैं, कई रिकॉर्ड बना लेते हैं, अपार धन में
कमाने लगते हैं और आज कल तो कुछ संन्यास भी ले लेते हैं, पर कॉनवे को तो अपने पहले
मौके का इंतज़ार था। उसने देश छोड़ना बेहतर समझा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में से न्यूजीलैंड
को चुना। वो भी उसके दो दोस्तों की वजह से मैकलम रोफाल और माइकल रिपन।
2017 में डेवन दक्षिण अफ्रीका से वैलिंग्टन पहुँच गए। रोजमर्रा के खर्च के लिए विक्टोरिया क्रिकेटिंग क्लब में कोचिंग का काम पकड़ लिया। पर अपने आप को साबित करने का जूनून अब भी था।
न्यूजीलैंड और किस्मत
जैसे दक्षिण
अफ्रीका में जब कोई खिलाडी नहीं खेलता तब उसकी जगह डेवन को जगह मिलती थी वैसे ही यहाँ
भी। वैलिंग्टन टीम के खिलाड़ी टॉम ब्लंडल को वेस्टइंडीज के साथ खेलने के लिए जाना पड़ा
तो वैलिंग्टन टीम ने डेवन को ओपनिंग के लिए भेज दिया। पहला लिस्ट A मैच।
जहाँ भी टीम
को जरुरत हुई और खिलाडी नहीं है तो तुरंत मौका मिल जाता। जैसे टॉम ब्लंडल के कारण उनको
टी-20 में भी जगह मिल गई। नेशनल टीम के प्रैक्टिस मैच में भी।
पर इस बार एक
गलती नहीं हुई वो था उनका प्रदर्शन। हर मैच के साथ प्रदर्शन बेहतर होता गया। वर्ष 2019-20
में प्रदर्शन ऐसा हुआ की उनको न्यूजीलैंड के राष्ट्रीय टीम का टिकट मिल गया। वैलिंग्टन
फायरबर्ड्स की तरफ से खेलते हुए 17 मैचों में 1598 रन बनाएं। एक पारी में 327 रन भी
बनाए जो न्यूजीलैंड के डोमेस्टिक इतिहास में आठवीं बार हुआ।
2020 में पहला
इंटरनेशनल मैच खेलने का मौका मिला जिसे उन्होंने अच्छे से भुनाया। तब से -
# टी20 में
41 रन
# वन डे के
3 मैचों में एक शतक और एक अर्धशतक
# और अब पदार्पण
टेस्ट में 200 रन।
पहले टेस्ट
से ही उन्होंने नए कीर्तिमान भी बना डाले। पहले टेस्ट में 20 चौके और 1 छक्के के साथ
200 रन वो भी एक दम वीरू स्टाइल। चौके से शतक तो छक्के से दोहरा शतक।
दक्षिण अफ्रीका
को छोड़ने का उनका निर्णय अब उनके लिए सही प्रतीत हो रहा है। अपना सब कुछ बेच कर अपने
सपने को पूरा करने का जूनून उनको न्यूजीलैंड ले आया जिसमें वो अब तक सफल हुए हैं।
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