IPL 2021: RR Vs PBKS - मयंक-राहुल पर भारी पड़ा Tyagi का अंतिम ओवर।
वर्ल्ड कप 1983 विजेता टीम के हीरोज् में से एक थे।
जब-जब वर्ल्ड कप 1983 की बात होती है तो ज्यादातर लोग सिर्फ कपिल देव की बात करते हैं। कभी-कभी मोहिंदर अमरनाथ, मदनलाल की। पर यशपाल शर्मा की बात बहुत कम होती है। जबकि वे उस सीरीज में भारत की तरफ से दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। उनके नाम उस वर्ल्ड कप में 8 मैचों में 34.28 की औसत से 240 रन बनाये थे।
विश्व कप सेमी फाइनल की ऐतिहासिक पारी
भारत यदि 1983 वर्ल्ड कप फाइनल में पहुँचा तो उसमें तीन खिलाड़ियों का महत्त्वपूर्ण योगदान था। एक मोहिंदर अमरनाथ और दूसरे यशपाल शर्मा और तीसरे संदीप पाटिल। ओल्ड ट्रेफर्ड के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम 213 के लक्ष्य को पाने के लिए उतरी तो उसने अपने 2 विकेट जल्दी खो दिए।
उसके बाद यशपाल शर्मा और अमरनाथ ने मिलकर 91 रनों की साझेदारी की। जिसके कारण भारत की स्थिति मजबूत हुई। वे दिवार की तरह एक छोर पर जम गए। उनके इर्दगिर्द अमरनाथ और बाद में तेज तर्रार संदीप पाटिल ने जीत की भूमिका लिखी। उन्होंने 143 गेंदों में 61 रन(3 चौके, 2 छक्के) बनाये। पाटिल (51 रन, 32 गेंद, 8 चौके) ने तो फिरंगी गेंदबाजों को पीट-पीट कर बेदम कर दिया था। जिसके बदौलत टीम आसानी से जीत सकी।
बॉब विलिस की यॉर्कर जैसी गेंद पर लेग साइड में जमाया उनका छक्का आज भी क्रिकेट इतिहास के यादगार शॉट्स में शुमार है।
Semi final match against England in 1983 World Cup pic.twitter.com/DcIz8cLxjk
— Yashpal Sharma (@cricyashpal) June 25, 2021
यशपाल को अपनी इस दृढ पारी के लिए 'मैन ऑफ़ द मैच' भी चुना गया।
कैसा था उनका क्रिकेट का सफर?
11 अगस्त 1954 को जन्में यशपाल ने 1978 में पकिस्तान के खिलाफ सियालकोट में अपना पहला वन डे (ODI) खेला। उसके एक साल के बाद ही उन्होंने अपना पहला टेस्ट लॉर्ड्स में खेला।
भारतीय टीम के लिए उन्होंने 37 एकदिवसीय और 42 टेस्ट मैच खेले। वन डे (ODI) में उन्होंने 28.48 की औसत से 883 रन और टेस्ट में 33.45 की औसत से 1606 रन बनाये।
घरेलू रणजी मैचों में में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 160 रणजी मैचों में 8933 रन बनाये। जिसमें 21 शतक और 201 उनका उच्चतम स्कोर रहा।
वर्ष 1983 में उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट(वेस्टइंडीज के खिलाफ, दिल्ली) खेला और 1985 में उन्होंने अंतिम बार भारतीय टीम के लिए ODI(इंग्लैंड के विरुद्ध, चंडीगढ़) खेला।
वे अपने एकदिवसीय करियर में कभी जीरो(0) पर आउट नहीं हुए।
टीम के 'बादाम'
टीम के 'बादाम' थे यशपाल शर्मा। उनको याद करते हुए अंशुमान गायकवाड़ कहते हैं की हम उनको 'बादाम' कहते थे। वो बादाम भिगो-भिगो के खाते थे और मैदान पर अपना जौहर दिखते थे। यशपाल अपने लम्बे-लम्बे छक्कों के लिए जाने जाते थे।
उनके निधन पर उनके कप्तान कपिल देव फफक-फफक के रो पड़े। उन्होंने कहा,
बहुत अजीब सा लग रहा है। मैं अपने आप को नहीं संभाल पा रहा। मैं मुंबई में हूं। फ्लाइट लेकर सीधा दिल्ली जा रहा हूं। बस यही कहूंगा रेस्ट इन पीस… वी लव यू यश!
साथ खिलाड़ी दिलीप वेंगसरकर को कुछ समझ नहीं आ रहा है। उनको तो विश्वास नहीं हो रहा है कि जिससे अभी एक हफ्ते पहले मिलकर आये, जो स्वथ्य था उनके साथ ऐसा हो गया। उन्होंने कहा,
"ऐसा हादसा हो जाएगा… कभी सोचा नहीं था।"
यशपाल शर्मा, दूसरी लाइन में बायें से दूसरे स्थान पर
संन्यास के बाद वो कुछ समय अंपायरिंग से जुड़े। उसके बाद बीसीसीआई ने एक महत्वपूर्ण रोल दिया। उनको भारतीय टीम का नेशनल सलेक्टर बनाया गया। 2008 में वापस उनको उस पैनल में शामिल किया गया।
अब यशपाल नहीं रहे पर उनकी पारियां, लम्बे-लम्बे छक्के और उनका खेल क्रिकेट प्रेमियों के दिल में जीवित रहेगा।
कैसी विडम्बना है की आज के दिन भारत ने अपना पहला ODI खेला था और आज के ही दिन पहले विश्वकप को जीतने में अहम् भूमिका निभाने वाला खिलाड़ी स्वर्गरोहित हो गया।
ॐ शांति, शांति, शांतिः यशपाल शर्मा जी!
RIP..
ReplyDeleteॐ शान्ति
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